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अंकुर सीड्स चारु तूर (अरहर) वैरायटी: बुवाई से कटाई तक लागत, उत्पादन और मुनाफा

अंकुर सीड्स चारु तूर (अरहर) वैरायटी: बुवाई से कटाई तक लागत, उत्पादन और मुनाफा

भारत में अरहर (तूर) की खेती दलहनी फसलों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। Ankur Seeds की चारु तूर वैरायटी को अच्छी पैदावार, मजबूत पौध वृद्धि और बेहतर दाना गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। उचित प्रबंधन के साथ यह वैरायटी किसानों को कम लागत में अच्छा लाभ दे सकती है।

चारु तूर की प्रमुख विशेषताएं

  • उच्च उत्पादन क्षमता वाली वैरायटी

  • पौधे मजबूत और शाखायुक्त

  • दानों का आकार अच्छा

  • कई क्षेत्रों में रोग सहनशीलता बेहतर

  • बाजार में अच्छी मांग


बुवाई का समय

  • खरीफ मौसम: जून से जुलाई

  • वर्षा आधारित क्षेत्रों में मानसून शुरू होते ही बुवाई करना लाभदायक रहता है।

बीज दर

  • प्रति एकड़ 3 से 4 किलोग्राम बीज

  • कतार दूरी: 4 से 5 फीट

  • पौधे की दूरी: 1 से 1.5 फीट

प्रति एकड़ अनुमानित लागत

खर्च का विवरण लागत (रुपये)
बीज 1,200 – 2,000
खेत तैयारी 2,000 – 3,000
उर्वरक एवं सूक्ष्म पोषक तत्व 2,500 – 4,000
खरपतवार नियंत्रण 1,500 – 2,500
कीट एवं रोग नियंत्रण 2,000 – 4,000
सिंचाई (यदि आवश्यक) 1,000 – 2,000
मजदूरी 3,000 – 5,000
कटाई एवं गहाई 3,000 – 5,000

कुल लागत: ₹16,000 से ₹27,000 प्रति एकड़

फसल अवधि

चारु तूर वैरायटी सामान्यतः 160 से 190 दिनों में पककर तैयार हो सकती है, हालांकि यह क्षेत्र और मौसम के अनुसार बदल सकती है।

उत्पादन क्षमता

अच्छे प्रबंधन के साथ:

  • सामान्य उत्पादन: 8–12 क्विंटल प्रति एकड़

  • उन्नत खेती में: 12–15 क्विंटल प्रति एकड़ या अधिक

आय और मुनाफा

यदि अरहर का औसत बाजार भाव ₹7,000 प्रति क्विंटल माना जाए:

सामान्य स्थिति

  • उत्पादन: 10 क्विंटल

  • कुल आय: ₹70,000

  • लागत: ₹22,000

  • शुद्ध मुनाफा: ₹48,000

अच्छी खेती की स्थिति

  • उत्पादन: 14 क्विंटल

  • कुल आय: ₹98,000

  • लागत: ₹25,000

  • शुद्ध मुनाफा: ₹73,000

अधिक उत्पादन के लिए सुझाव

  1. बीजोपचार अवश्य करें।

  2. खेत में जल निकास अच्छा रखें।

  3. प्रारंभिक 45 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण करें।

  4. फूल आने के समय कीटों की निगरानी करें।

  5. संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।

  6. समय पर कटाई करें ताकि दानों का नुकसान न हो।

निष्कर्ष

अंकुर सीड्स की चारु तूर वैरायटी कम बीज लागत और अच्छे उत्पादन की क्षमता के कारण किसानों के लिए लाभदायक विकल्प मानी जाती है। प्रति एकड़ लगभग ₹16,000–27,000 की लागत में ₹48,000–73,000 या उससे अधिक का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है। जिन क्षेत्रों में वर्षा अच्छी होती है और अरहर की खेती सफल रहती है, वहां यह वैरायटी बेहतर कमाई का साधन बन सकती है।

ध्यान दें: वास्तविक उत्पादन, लागत और मुनाफा आपके क्षेत्र, मिट्टी, मौसम, सिंचाई और बाजार भाव के अनुसार अलग हो सकता है।

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